Tuesday, 2 July 2013

प्रकृति नहीं मनुष्य है अहंकारी...





अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए ना जाने कितने ही भक्त हरिद्वार..की यात्रा करते हैं,,,अमरनाथ,,केदारनाथ और बद्रीनाथ और ना जाने ही कितनी जगह...जिंदगी का कमाया पाप एक की झटके में भगवान को अर्पित कर फिर से पाप में गोते में लगाने को तैयार मिलते हैं,,,हर तरफ हर जगह भगवान की मूर्ति तो स्थापित कर अतिक्रमण का स्तंभ बनाया हमने भगवान को,,,भई अकेले पाप थोड़े ही करेंगे तुम्हें भी शामिल करेंगे...भगवान शिव की एक तस्वीर आज सुर्खियों में है,,,जैसे भगवन ने ही कोई पाप कर दिया हो...लेकिन ऐसा नहीं है...भूल तो हमने की...दीवारों,,,पीकदानों...और ना जाने कितनी जगह भगवान की असाधारण छवि को आकार के सहारे बढते देखा,,,प्रकृति को दरकिनार कर मूर्ति में मन लगाया इंसानों ने...आज की छवि से भी अगर इंसानों से सीख नहीं ली तो यकीन मानिए प्रलय का प्रबल और अहंकारी चेहरा भी हमे ही देखना होगा...भगवान की मूर्ति आज गंगा के साथ बह निकली...भगवान को जैसे गंदगी से राहत मिल गयी,,,शांत मन से योग साधना में जुटे शिव ने गंगा में स्नान किया और कहा कि गंगा मैं अब वाकइ शुद्ध होना चाहता हूं...और हुआ भी वही...आज का ये दर्दनाक दृश्य इसलिए भी सामने आया क्यूंकि हमने अपने भगवान को दिन में इज्जत देने के बजाए सड़क और नालियों के किनारे स्थापित करने में अपना बड़प्पन समझा...क्या गलत किया उपर वाले ने अगर खुद ही गंदगी साफ कर दी...उसकी रचना वो चाहे जो करे...बनाए ..या बिगाड़े...कहां गए अब हिदुत्व का नारा लगाने वाले लोग...टीका चंदन और त्रिपुंड का असर क्यूं नहीं दिखता? याद रखिए प्रकृति ही भगवान है...उसे भूलिएगा तो सजा भी पाइएगा..